तुमसे दूर जाने के बाद मुझे मलाल सिर्फ इस बात का रहेगा कि मैं तुम्हें वहाँ नहीं ले गया जहाँ जाने की जिद्द तुमने हम दोनों के मिलने के पहले दिन से की थी। जब हम कॉलेज में थे तब तुम डरती थी कि कहीं पापा या घर वाले तुम्हें लोकल में न देख लें और फिर घर में तुम्हारी क्लास न लग जाये। इस वजह से हम कभी मरीन नहीं जा पाये और फिर नौकरी मिलने के बाद समय ही नहीं मिल पाया कि मैं तुम्हें ले चलू।
हाँ वही मरीन जहा कपल्स आना पसंद करते हैं। मुंबई और आस - पास के इलाकों के कयी कपल्स यहाँ रोजाना आते हैं। मरीन का एक अपना अलग ही मजा हैं। सामने समुन्द्र होता है तो कपल्स यहा बैठ कर हाथों में हाथ डाले घाटों बातें करते है। कोई फ़ोटो निकलवाता है तो कोई यहा बिकने वाली चाय पीता है।
मुझे लगता है कि मरीन आ कर यहाँ पर घूमना भारत का हर कपल चाहता है फिर चाहे वो मुंबई से हो या फिर कहीं और का।
तुम्हरा मेरे साथ मरीन घूमना शायद तुम्हारे सपनों में से एक था। लेकिन मुझे अफसोस है कि मैं तुम्हें यहाँ नहीं घुमा सका।
शायद तुम मेरे साथ मरीन इसलिए जाना चाहती थी कि मैं लोकल में तुमको लेकर जनरल डिब्बे में चढू और फिर भीड़ में जगह बना कर लोकल में बने लोहे के दीवार में तुम्हारे लिए जगह बनाऊ और फिर दोनों हाथों से तुम्हें लेफ्ट और राइट से कवर कर लूँ ताकि तुम मेरे हाथों के बीच सुरक्षित रह सको। और फिर मेरी शर्ट की जेब में से हेड फोन निकाल कर हेड फोन का एक हिस्सा अपने कानों में और दूसरा मेरे कोनो में डाल कर अपना मनपसंद गाना प्ले करो और फिर उस गाने पर मुझे भी गूं गुनाने के लिए कहो। कुछ देर बाद जब गाने से पेट भर जाये तो मुझे अपने घर और दोस्तों की बातें सुनने के लिए कहो और फिर अपनी दोस्त द्वारा की गई किसी गलती पर मुझे भी राय देने के लिए कहो ताकि अगले दिन तुम उसे कह सको की मेरा सूरज भी ऐसा कह रहा था।
कुछ घंटो बाद जब हम लोकल से उतर कर मरीन जाने के लिए टैक्सी का इंतज़ार करें तो तुम अपनी आँखें चौड़ी कर मुझसे कहो की लोकल में लोग कैसे सफर कर लेते है मेरा तो आज का ये आखरी दिन था इसके बाद तो मैं कभी नही आऊंगी !
टैक्सी में बैठ जाने के तुरंत बाद शायद तुम मुझसे सवाल करो कि कितने देर में मरीन आ जायेगा और संतुष्ठ जवाब मिलने के बाद तुम टैक्सी की विंडो से बाहर की दुनिया को उम्मीद भरी नज़रों से देखने लगो।
मरीन के आते ही जब मैं टैक्सी वाले को पैसे देने में व्यस्त हो जाऊं तो शायद तुम मुझे बिना बताये ही समुंदर को देखते देखते 15 - 20 कदम आगे निकल जाओ। फिर समुंदर और वहाँ की खूबसूरती को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करने लगो। क्योंकि आज कल मोबाइल फोटोग्राफी अपने चरम सीमा पर हैं। पैसे देने के बाद जब मैं दौड़ कर तुम्हारे पास आऊं तो शायद पहले तुम मुझे वो सारी तस्वीरे दिखाओ जो तुमने अब तक खींच ली होंगी और फेसबुक पर चेक इन करने के लिए कौनसी फ़ोटो अच्छी है इसके बारे में पूछो।
इसके बाद तुम शायद मुझसे अपनी फोटोग्राफी करवाओ और कैंडिड फ़ोटो लेने के लिए अलग - अलग पोज दो और जब एक भी फ़ोटो अच्छी न आये तो मेरी फोटोग्राफी पर सवाल उठाओ और खुद पर्फेक्ट फोटोग्राफी की डेफिनेशन बन जाओ।
इन सब से जब तुम फ्री हो जाओ या फिर जब तुम्हारी मोबाइल की बैटरी कम होने लगे तो तुम और मैं मरीन पर बने दीवार पर पैर लटका के बैठ जाये और फिर हमारी बातें करें और बार - बार आती जाती लहरों को पत्थरों से टकराते हुवे देखें और जब शाम होने लगे तो वहाँ पर ही एक - एक चाय पी कर अपने घर के लिए निकल पड़े।
शायद तुम मुझसे मरीन के बहाने इतनी यादें चाहती थी।
शायद तुम्हारा,
#MaiThinker

Shukriya apka
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