ये हौसलों की उड़ान है ....... उड़ान है...... उड़ान .......

 ये हौसलों की उड़ान है ....... उड़ान है...... उड़ान ....... 



ओ ओ धीरे- धीरे छाव में रंग बन के उडी- उडी जाऊ मैं पतंग बन के , खोल के अपने ये पर सारे हवा से खेलु मैं तरंग बन के, मैं बाँटु सबको उजाले   ऐ ऐ ऐ......  चाँद छूने का अरमान है। ये हौसलों की उड़ान है , ये हौसलों की उड़ान है ....... उड़ान है...... उड़ान ....... 

कलर्स चैनल पर  आने वाले धारावाहिक " उड़ान " में जिस तरह से छकोर अनेक काटनाईओ से झुझने के बाद आखिर कार अपने आत्मविश्वास और हार को मात देने वाली हिम्मत से वह दौड़ की प्रतियोगिता को जीत लेती है ठीख इसी कहानी से मिलती जुलती है ये कहानी बख्शो की ..... 

कहते है बुलंद हौसलों के आगे बड़े - बड़े पहाड़ झुक जाते है।  बस आगे बढ़ने की हिम्मत के साथ चुनौतियों से लड़ने का जज्बा होना चाहिए। ऐसे ही हौसले की मिसाल है हिमाचल के ऊना के ईसपुर गॉव की छात्रा बख्शो देवी , हाल ही में ऊना में हुई दौड़ प्रतियोगिता में नौवीं की इस छात्रा ने नंगे पांव दौड़कर पांच हजार मीटर की स्पर्धा में जिले भर की धाविकाओ को पछाड़ दिया।  स्कूल की वर्दी में नंगे पांव दौड़ती हुई उस छात्रा के जज्बे को दर्द भी नहीं रोक पाया। इंदिरा मैदान में दौड़ते हुए अचानक बख्शो के पेट में तेज दर्द उठा, लेकिन जीत के जूनून ने कदमो को ऐसी रफ़्तार दी की दूसरी एथलीट इसके आसपास भी नहीं पहुंच सकी। उसके विरोधी जूतो और किट के साथ ट्रैक पर थी। बख्शो के पैरो में न जूते थे और न ही पहनने के लिए निकर और टी-शर्ट। बस स्कूल की वर्दी के सह मैदान में नंगे पांव बख्शो उतर गई और जीत कर ही दम भरा। आखिरकार गरीब परिवार की बेटी की मेहनत रंग लाई और ख़िताब की हक़दार बनी।  इस होनहार लड़की में आगे बढ़ने का हौसला तो है लेकिन घर में कोई ऐसा नहीं है जो इसके हौसले को और बढ़ाने में इसकी मदद कर सके। इससे बड़ी विड़बना और क्या होगी कि इस होनहार के पास ट्रैक पर दमखम दिखाने के लिए जुटे तक नहीं है।  बख्शो देवी अपने घर में छह बहनो में सबसे छोटी है। उसके सर पर पिता का साया भी नहीं है। माँ मेहनत मजदूरी कर परिवार को पाल रही है।  प्रतियोगिता में पहले स्थान पर रहने वाली बख्शो को इनाम के तौर पर छह हजार मिले तो उसने कहा की यह पैसे वह अपनी माँ को देगी क्योंकि माँ को घर का खर्च चलना होता है। बख्शो का कहना है की दौड़ना उसका शौक है और धाविका बनना अंतरराष्ट्रीय धाविका पीटी उषा की तरह नाम कामना चाहती है। ---- 

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