हम सब स्वच्छता अभियान पर है। इसलिए जब हगने की जगह दी जाए तब हगिए वरना अपना हगा हुआ मल उठाने के लिए खुद तैयार रहिए।
ये पढ़ते ही आप सब झल्ला गए होंगे कि ये क्या लिख रहा है इसे कोई सेंस है या नहीं। घिंन भी आ रही होगी शायद। लेकिन ये सब लिखना मैंने तो समाज से ही सीखा है।
दरसअल मध्य प्रदेश के गुधौरा गांव में एक 6 साल की बच्ची से गांव के ही एक शख्स ने उसे उसके हाथों से मल उठाने को कहा। 6 साल की लड़की जो गाँव के ही एक स्कूल में कक्षा पहली में पढ़ती है जो अपने टीचर से पूछ कर शौच के लिए गई थी लेकिन उसकी यही गलती थी कि उसने खुले में शौच किया। जिसको गांव के ही एक शख्स ने देख लिया और उसे उसके ही मल को हाथ से उठाने के लिए कहा। डर के मारे बच्ची ने भी मल को उठा लिया लेकिन ये कैसा स्वछता अभियान है जहाँ गरीबो की कोई इज्जत ही नहीं है।
https://youtu.be/q6wImRS-Q90
एक बात बातये क्या स्वछता का पार्ट हमे मोदी जी ने ही सिखाया है। या फिर हम बच्चपन से अपने घर से, अपने माँ बाप से अपने स्कूल से स्वच्छता कैसे रखना है कैसे करना है सीखते आ रहे है। लेकिन आप सभी का यूँ अचानक स्वच्छता को लेकर इतना तत्पर हो जाने का ये मतलब तो नहीं है ना कि आप सही और गलत का फर्क ही भूल जाए।
मुझे ये नहीं पता कि उस लड़की के स्कूल में शौचालय है या नहीं। लेकिन आप स्वछता के नाम पर किसी की इज्जत नहीं उछाल सकते हो।
नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद दो अक्टूबर को स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की थी। उससे पहले लाल किले से देश को संबोधित करते हुए,
उन्होने कहा “गरीबों को सम्मान मिलना चाहिए और मैं चाहता हूं कि इसकी शुरुआत सफाई से हो। देश के हर एक स्कूल में शौचालय का निर्माण करवाकर इसे अंजाम दिया जाएगा, छात्राओं के लिए हर स्कूल में अलग से शौचालय का निर्माण करवाया जाएगा। ऐसा करके ही बेटियों को पढ़ाई बीच में छोड़कर जाने से रोका जा सकता है।”
स्वछता अभियान तो शुरू कर दिया गया है लेकिन देश में स्वच्छता अभियान के नाम पर टॉयलेट व्यपार भी शुरू हो गया है। नए नए शुलभ शौचालय देखने को मिल रहे है। लेकिन अब हगने का भी पैसा लगता है। अब ये तो जरूरी नहीं है ना कि हर हगने वाले के पास पैसा हो।
अब सरकार के पास इतना पैसा तो है कि वो देश मे स्वच्छता रखने के लिए शौचालय को मुफ्त करवा दें। तो हो सकता है कि भविष्य में फिर किसी लड़की या लड़के को इस तरफ खुद का मल ना उठाना पड़े।
इस हादसे के बाद स्वच्छता के लिए चिंतित लोगों से ये सवाल है कि "काश! कभी ऐसा सुनने को मिलता कि किसी बच्ची ने खुले में शौच किया तो स्वच्छता के लिए चिंतित लोगों ने उसके मल को साफ किया और यह सुनिश्चित किया कि जल्द से जल्द शौचालय की व्यवस्था हो। अपने आप भारत स्वच्छ हो जाता। ना अक्षय कुमार जी को सिनेमा बनाने की ज़रूरत पड़ती, ना ही उनकी बीवी को पार्ट-2 के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती।
By, Suraj Mourya

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