मैं कागज पर भावना लिखता हूँ।

       

ये टाइटल बहुत पहले मिल गया था। पर लेख क्या लिखूं समझ नहीं आ रहा था। खैर अब आ गया है तो सोचा लिख भी दूँ।



 जब भी मैं अकेला महसूस करता हूँ तो मेरे अंदर तरह तरह के विचार आने लगते है भावनाएं आने लगती है। लेकिन अपनी भावना को कागज पर लिखने से मैं ये जान पाता हूँ कि असल में मैं कैसे महसूस कर रहा हूँ। जब मैं अपनी उदासी की वजहों को कागज के पन्नो पर उतार देता हूँ तो मेरा मन हल्का हो जाता है।तब उदासी के काले बादल भी धीरे धीरे छंटने लगते है।

मेरी भावना भी मेरे अनुरूप होती है। ये सच है कि हर इंसान ज़िंदगी के किसी न किसी मोड़ पर निराश होता है। कोई अपने प्यार की नाकामी में उदास होता है तो कोई अपने सपने के टूट जाने की वजह से। लेकिन जब आप अपनी उदासी को शब्दों का रूप देते हो तो आप एक अच्छे लेखक बन जाते हो। अब ये भी तो कहना गलत नहीं है ना कि हमसे अच्छा हमारे दर्द को कौन बयान कर सकता है। फिर वो दर्द प्यार में मिला हो या फिर किसी और वजह से।

सबकी अपनी अपनी अलग भावना होती है। मेरी भावना मैं ही लिख सकूँगा क्योंकि उसे सिर्फ मैं ही समझता हूँ और आप अपनी। हाँ लेकिन लिखने की वजह एक हो सकती है।

मैंने नहीं किसी ने लिखा है
 " मैं कागज पर रुमानियते लिखता हूँ।"
"कहते - कहते हम उतना गहरा नहीं उतर पाते,
जितना - लिखते लिखते उतर जाते है। इसलिए मैं सिर्फ लिखता हूँ।"

और मैं कागज पर भावना लिखता हूँ।

By, Suraj Mourya

Comments

  1. Apki bhavnaye is Bhavna ko bhut psnd ayi😂😂😂

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    1. Shukriya ummeed karta hun ki aage bhi pasand aayegi.😉😋

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