मेरा आशावादी ह्रदय तुम्हारा इंतेज़ार जरूर करेगा। ये जान कर भी की तुम नहीं आओगी।

 

मैंने किसी से बात करने की कोशिश की भी थी लेकिन उसने नहीं किया। मतलब किया पर थोड़ी बहुत शायद वो वो नहीं समझ पा रही थी जो मैं समझना चाह रहा था। इसमे जो प्रेमी है वो अपना भाव कहना चाह रहा है।

जब तुम ये पढ़ो तो हो सकता है तुम को ये महसूस हो कि बातों बातों में मुझे तुमसे इश्क हो गया था।
मतलब इश्क अभी भी है और आखिरी सांसो तक रहेगा। लेकिन तुमको कह पाने की कशिश और न समझा पाने का दुख मुझे हमेशा खुरेदेगी।

कोशिश तो यही रहेगी कि इस मुद्दे पर दिल से बात ना करूँ। लेकिन मुझे पता है कि मैं चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि बात तो करनी होगी। क्योंकि ना तो मेरा प्रेम पाकिस्तान जैसा है और ना तुम नवाज जैसी।

वैसे गलती तो मेरी ही है तुम्हारी भी है लेकिन कुछ कह नही सकता। क्योंकि इश्क में आरोप - पत्यारोप वाजिब नहीं लगता।

बेशक तुम सुंदर हो इसमे कोई दो राय नहीं लेकिन असल बात तो ये है कि मुझे तुम्हारी सुंदरता से बिल्कुल प्रेम नहीं है। असल मे मुझे तुमसे प्रेम है। हो सकता है कि तुमको मेरी ये बातें मेरी बकैती लगे "कुछ मैसेजस और बात करने से कैसे इश्क हो सकता है। जिसमे खुबसूरती भी मायने नहीं रखती है।

और तुम इस पर ओह्ह ओह्ह जैसे भाव देने के लिए आज़ाद हो। मुझे अच्छा लगेगा तुम ओह्ह ओह्ह करके अपने दोनों होठों को जुदा कर दो कुछ पल के लिए।

मैं तो पागल हूँ कुछ भी लिखता हूँ। लेकिन जो अनुभूति और विरह तुम्हारे होठों ने महसूस की होगी उन दरमियान। बिल्कुल वैसा ही मैं महसूस कर रहा हूँ।

मुझे पता है कि मेरा हक नहीं है तुम पर और होना भी नहीं चाहिए। मगर बयान नहीं करता तो जीवन भर इसी दिक्कत में जीता की  काश उस दिन बता दिया होता तो बात बन सकती थी। मुझे पता है कि अब बात नहीं बन सकती फिर भी मेरा आशावादी ह्रदय तुम्हारा इंतेज़ार जरूर करेगा। ये जान कर भी की तुम नहीं आओगी। और कर भी क्या सकते है थोड़ा ही सही जो भी था या है या रहेगा शायद प्रेम ही है।

एक बात भूल गया हूँ जो बात तुमसे कहनी थी शायद कह नहीं पाया

"किसी ने लिखा है, ,अगर हद होती मेरे प्रेम की तो ना तुमसे अनहद होती ना तुमसे बेहद होती।"

शायद तुम्हारा....

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