क्या आपको दो का पहाड़ा याद है। कैसे हम झूमझूम कर याद करते थे।



मैं ये लेख हिंदी मीडियम से पढ़े और पढ़ रहे लोगों को समर्पित करता हूँ।


आज संडे है। बारिश का मौसम चल रहा है। पता है मुझे की आप सब आज अपनी पसंदीदा मूवी या कोई किताब पढ़ रहे होंगे। बहोत लोग ऐसे होंगे जो अपना मोबाइल क्लीन कर होंगे। मेरा मतलब है मोबाइल से व्हाटसअप के फोटोज और वीडिओज़ को डिलेट कर रहे होंगे। इसी तरह और लोग भी ना जाने क्या क्या करे रहें होंगे। जो मेरे सोच के परे है।

उटपटांग सोचता हूँ इसलिए ये टुटा फूटा लिख रहा हूँ गुस्ताखी माफ करना।

मैंने भी अपना सारा काम कर लिया है खुद को एक दम फ्री फ्री फ्री कर लिया है इस लेख को लिखने के लिए। पिछले एक हफ्ते से मन मे था कि इस चीज़ पर कुछ लिखूं। सबको कुछ याद दिलाऊँ। कुछ ऐसी चीज़ की जब ये लेख आप पढ़े तो यही सवाल आप अपने दोस्तों से भी करें और हँसी के ठहाके मारे।

तो सवाल ये है कि क्या आपको दो के पहाड़े याद है ?

ये सवाल मैं भी आपसे नहीं करता अगर मेरे दफ्तर में इस पहाड़े को लेकर कोई बात नहीं होती। तो हुआ यूँ की मैं अपने ऑफिस कलिगस के साथ कैंटीन में लेमन टी का लुफ्त उठा रहा था। तब अचानक से एक ने कहा कि सूरज क्या तुम्हें पहाड़े याद है ? मैंने कहा  क्या बात कर रहे हो क्यों नहीं याद होगा। तो कहने लगे कि सुनाओ जरा।



मैं भी मस्त होशियार चंद की तरह सुर और ताल पकड़ कर सुनाने लगा। अब उसमें हुआ ये की दो छंग बारह की जगह चौदह बोल दिया। जंहा मैं गलत हो गया। सब हसने लगे। वो लोग मेरे गलत होने पर नहीं हँस रहे थे वो तो पहाड़े सुनाते वक्त मेरे रिदम और चेहरे के एक्सप्रेशन और 200 कि गति से निकले पहाड़े को सुन कर हँस रहे थे। खैर इसका वीडियो रिकॉर्ड भी हो गया था जिसे मैंने भी देखा और माँगना मत क्योंकि वो डिलेट हो चुका है अब।

वीडियो देखने के बाद खुद को शर्म भी आई लेकिन स्कूल लाइफ भी याद आ गई। कैसे स्कूल में गणित के सर पहाड़े याद करवाते थे।और किस तरह हम उन्हें दोहराते थे। उस वक्त जोड़ घटना गुणा भाग और पहाड़े यही तो हमारे गणित विषय मे पास होने के मुख्य किरदार थे। सर कहते थे जिन्हें ये आऐगा उनकी नईया गणित में पार है। खैर ये सब लिखते वक्त बहोत हँसी आ रही है। जाहिर है आपको भी आ रही होगी।


 

लेकिन क्या करे जब हम बड़े हो कर अपनी अपनी ऑफिस वाली लाइफ में मशरूम हो जाते है तो कोई मुझ जैसे ही होता है जो इस तरह के उटपटांग लेख लिख कर आपको आपकी पुरानी दुनिया मे ले जाता है। जहां सब कुछ माफ होता है। आपका सबके सामने रोना, नाक का बहते बहते आपके मुँह में चले जाना और चुपके से उसको अपने शर्ट में पोछ लेना। और अपनी सेल्ट को अपनी जुबान से चाट चाट कर साफ कर देना। जल्दी से खा खा कर चौक का बॉक्स खत्म कर देना और घर पर कहना कि खत्म हो गया।

मुझे अब भी याद है जब मैं स्कूल में पड़ता था तब अगर पापा के कोई भी दोस्त घर आते थे तो पहले बड़े प्यार से पूछते की बेटा स्कूल जाते हो। हम कहते कि हाँ जाते है अंकल। अंकल अपनी आवाज़ में दम भरते हुए कहते कि वाह!! बढ़िया। चलो कुछ सुना दो। पहाड़े ही सुना दो।

लेकिन एक बात आज तक समझ नहीं आयी कि जो भी घर पर आता था तो पहाड़े ही क्यों पूछता था। ये क्यों नहीं पूछता था कि बेटा शक्तिमान देखा, विक्रम बेताल देखा। खैर इसका जवाब मैं आज तक ढूंढ नहीं पाया हूँ।



लेकिन जो भी हो ऐसे किए गए सवाल पर हम जवाब में बिना रुके ही बस कुछ मिनटों में ही पहाड़े सुना दिया करते थे।

मुझे 9, 14, 18,19 के पहाड़े याद करने में एक हफ्ता लग गया था। और घर पर जो भी आता था उन्हें इन 9,14,18,19 के पहाड़े से प्यार होता और हमे नफरत। हंसिये मत मुझे पता है आपके साथ भी ऐसा ही होता था। और कितनो की तो जम कर पिटाई भी हुई होगी वो भी पापा की गालियों के साथ। लेकिन फिर भी याद नहीं हुआ होगा।

अच्छा कमेंट में ये जरूर बताइयेगा की 9,14,18,19 के पहाड़े किन किन लोगों के आज भी दुश्मन है।

सबसे प्यारे पहाड़े होते थे जैसे कि 10,11, और 20 के। मुझे पता है आप लोगो को भी ये जल्दी ही याद हुए होंगे।

पता नहीं पहाड़ो का वो दौर फिर से आयेगा या नहीं क्योंकि अब स्कूलों में पहाड़ो की जगह टेबल्स ने ले ली है। एक बार आप सब कोशिश करना पहाड़े पढ़ने की फेसबुक लाइव के साथ। 10, 11 और 20 के पहाड़ो की कसम है अगर नहीं गए फवेबूक लाइव तो सारे पहाड़े भूल जाओगे। कभी - कभी लोगों के हंसी का पात्र भी बन जाया करो यारों ज़िंदगी हसने का मौका तो देती रहेगी।

By Suraj Mourya







Comments

  1. सूरज जी बचपन याद दिला दिया। जब पापा पहाड़े याद ना कर पाने के लिए कितनी बातें सुनाते थे। मैं खुद हिंदी माध्यम की छात्रा रही हूं और बहुत दिनों बाद किसी के लेखन में पहाड़े शब्द देख कर अच्छा लगा, वरना पहाड़े तो अब टेबल बन चुके हैं । वह बात मेरे भी दिमाग में घूमती है कि शक्तिमान और टीवी के बारे में क्यों नहीं पूछता था कोई
    😊😢😢☺☺। बहुत उम्दा सूरज।!

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  2. शुक्रिया भावना जी याकि की आप फेसबुक लाइव पहाड़े के साथ जा रही हो।😝😉

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