अनमोल जैसे और भी बालक है जो छोटी से उम्र में दोहरी ज़िन्दगी जी रहे है।

             

ये है अनमोल सिंह राजपूत उम्र ९ वर्ष है जब अनमोल के पिता जी की पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में थी तब उनकी मृत्यु हो गयी थी । छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग ने अनमोल को उनके पिता के स्थान पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की ,जब अनमोल १४ वर्ष का हो जायेगा तब उसे हफ्ते में ३ दिन sp ऑफिस में ड्यूटी करनी पड़ेगी।  ऑफिस में उसे छोटे छोटे काम करने पड़ेगे जैसे पानी की बोतल भरना, कागज़ो की फोटोकॉपी करना, फाइल एक जगह से दूसरी जगह ले जाना । अनमोल  ३ दिन ही स्कूल जा पायेगा । अनमोल के स्कूल में  जब भी कोई फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता होती है तब वह पुलिस ड्रेस ही पहन का जाता है, साथी बच्चे उसे चिढ़ाते है । माँ को अनमोल को खाकी में देखना अच्छा नहीं लगता क्यों कि खाकी वर्दी अनमोल के पिता कि याद दिलाती है  ,पर ड्यूटी के बदले अनमोल को ४५०० रुपए मिलते है उस से घर खर्च चलता है।  दंतेवाड़ा में पुलिस ड्रेस में पहन कर चलना जान लेवा साबित हो सकता है ,पर अनमोल को डर नहीं लगता।  एक तरफ अनमोल जैसे बच्चो को देख कर अच्छा लगता है कि छोटी सी उम्र में देश भक्ति जन सेवा कि ओर चल पड़े है वही दूसरी ओर लगता है कि इनकी दोहरी ज़िन्दगी का इनके जीवन पर क्या असर पड़ेगा, क्या इनके जीवन में यह एक अवसर है या फिर श्राप । क्या अनमोल कभी अपने पिता कि मृत्यु से हुए बदलाव से उभर पायेगा ।
अनमोल जैसे और भी बालक है जो छोटी से उम्र में दोहरी ज़िन्दगी जी रहे है।ये है अनमोल सिंह राजपूत उम्र ९ वर्ष है जब अनमोल के पिता जी की पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में थी तब उनकी मृत्यु हो गयी थी । छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग ने अनमोल को उनके पिता के स्थान पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की ,जब अनमोल १४ वर्ष का हो जायेगा तब उसे हफ्ते में ३ दिन sp ऑफिस में ड्यूटी करनी पड़ेगी।  ऑफिस में उसे छोटे छोटे काम करने पड़ेगे जैसे पानी की बोतल भरना, कागज़ो की फोटोकॉपी करना, फाइल एक जगह से दूसरी जगह ले जाना । अनमोल  ३ दिन ही स्कूल जा पायेगा । अनमोल के स्कूल में  जब भी कोई फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता होती है तब वह पुलिस ड्रेस ही पहन का जाता है, साथी बच्चे उसे चिढ़ाते है । माँ को अनमोल को खाकी में देखना अच्छा नहीं लगता क्यों कि खाकी वर्दी अनमोल के पिता कि याद दिलाती है  ,पर ड्यूटी के बदले अनमोल को ४५०० रुपए मिलते है उस से घर खर्च चलता है।  दंतेवाड़ा में पुलिस ड्रेस में पहन कर चलना जान लेवा साबित हो सकता है ,पर अनमोल को डर नहीं लगता।  एक तरफ अनमोल जैसे बच्चो को देख कर अच्छा लगता है कि छोटी सी उम्र में देश भक्ति जन सेवा कि ओर चल पड़े है वही दूसरी ओर लगता है कि इनकी दोहरी ज़िन्दगी का इनके जीवन पर क्या असर पड़ेगा, क्या इनके जीवन में यह एक अवसर है या फिर श्राप । क्या अनमोल कभी अपने पिता कि मृत्यु से हुए बदलाव से उभर पायेगा ।
अनमोल जैसे और भी बालक है जो छोटी से उम्र में दोहरी ज़िन्दगी जी रहे है।

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