क्या आपने भी हैप्पी मदर्स डे का तोरण अपने फेसबुक वॉल पर लगाया है। तो अपनी माँ को एक बार पढ़ कर जरूर सुनाए।




लगभग - लगभग आज इस डे पर फ़ेसबुकिया दुनिया के सभी नागरिको ने मदर्स डे के नाम का तोरण अपने अपने फेसबुक वॉल की दीवार पर लगा दिया है। अचानक सोशल मीडिया में दिवाली का माहौल बन गया है। और हमने भी इस नाम का तोरण अपनी वाल पर लगा दिया है।

अब हम बात करते है फेसबुक की दुनिया के कुछ ऐस चुनिंदाे लोगो की जिन्हें आज के हैप्पी मदर्स डे वाले तोरण से ऐतराज है। हां होना भी चाहिए। अब हम उन्हें गलत नही बोल सकते क्योंकि लोकतंत्र है भाई सबको फ्रीडम ऑफ स्पीच का यानी कि मुँह फाड़ने की आज़ादी है।

लेकिन आप ही सोचिए पता नही कितने सालो से दुनिया के लेखक अब तक माँ पर लिखते आ रहे है। हर भाषा मे हर तरह से आपको माँ पर आधारित कोई न कोई किताब, कविता, सुविचार कुछ न कुछ जरूर मिल जाएगा।

लेकिन चौकाने वाली बात ये है कि आज इतने लेखनो के बाद भी आज के इस दिन पर कितने लोग है जो कुछ न कुछ जरूर लिख रहे है अपनी माँ के लिए। ये हैरान कर देने वाली बात है कि माँ पर लिखने के लिए आज भी कितना कुछ है लोगो के मन मे। लोग कितना कुछ लिख सकते है लोग कितना कुछ सोच सकते है अपनी माँ के लिए। ये दर्शाता है कि हम सिर्फ एक माशूका या फिर महबूबा के लिए ही नहीं बल्कि अपने माँ के लिए भी लिख सकते है।

कुछ साल पहले एक शायर ने भी अपने शेर में माँ का जिक्र कर शेर की दुनिया मे क्रांति ला दी थी जिसन का नाम है मुन्नवर राणा।

तो बस लोगो से यही निवेदन है कि अपनी मन कि भावना को जरूर लिखे और एक बार जरूर अपनी माँ को पढ़ कर सुनाए कुछ पल के लिए ही सही वो खुश जरूर होगी और यही उसका मदर्स डे का गिफ्ट होगा।

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