किसी ने सही कहा है कि एक राजा का बेटा 40 साल तक छोटा होता है और एक मजदूर का बेटा 10 साल में ही बड़ा हो जाता है।
तस्वीर देख रहे है आप इलियास शेख नाम है इसका 10 साल का है पूछने पर पता चला की इलाहाबाद का है जंहा वह दूसरी कक्षा में पढ़ता है। अभी गर्मियों की छुट्टि है तो कुछ पैसे कमाने के लिए मुंबई चला आया।
इलियास के पिता इलाहाबाद में ही एक पेट्रोल पंप पर काम करते है महीने का 3500 कमाते है। जिससे उनका घर रुक रुक कर ही सही लेकिन चल जाता है।
इलियास से मैं मुंबई के भिवंडी शहर के KGN चौक पर मिला। जंहा इलियास एक मोबाइल शॉप पर अपना मोबाइल बनवाने आया। पहले तो बहुत आश्चर्य हुआ कि एक छोटा सा लड़का जो कि महज 10 साल का है वो अपना मोबाइल बनाने का खर्चा खुद ही उठा रहा है।
मैं इलेक्शन का सर्वे करने के बाद वहीं मोबाइल शॉप पर बैठ कर अपना मोबाइल चार्ज कर रहा था और इलियास के बारे में सोचने लगा था। मोबाइल वाले ने इलियास से कहा कि 400 रुपये लगेंगे लेकिन तुम पैसे मत देना मुझे अच्छा नही लगेगा तुमसे पैसे लेने में। मैंने दुकानदार से पूछा भाई ऐसा क्यों... तब दुकानदार ने पूरी बात बताई।
इलियास मुंबई में कुछ लोगो के साथ अकेले रहता है। यंहा वो अपने पिता के सर का बोझ हल्का करने आया है। वो सुबह 10 से शाम 9 बजे तक लूम में धागा ढालने का काम करता है और महीने के 4 से 5 हजार कमा लेता है।
पूरी बात जानने के बाद मैंने इलियास के लिए चाय और बिस्किट आर्डर की और इसी चाय के बहाने मैं उसके साथ बात-चीत करने लगा। बातों बातों में ये भी पता चला कि इलियास को पढ़ने का बहुत शौक है। लेकिन उससे पिता की गरीबी देखी नही गयी तो वो यहाँ चला आया। दरअसल इलियास का परिवार आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है जंहा न जाने यंहा हर रोज कितनी जरूरते अधूरी रह जाती है और कितने सपने नींद खुलते ही भूला दिए जाते है।
चाय और बिस्किट खाते वक्त इलियास एक दम छोटा बच्चा लग रहा था। कैसे बिस्किट को चाय में डुबो- डुबो कर खा रहा था। अगर देखा जाए तो इलियास वो बच्चा है जो उम्र से पहले बड़ा हो गया है लेकिन खाते वक्त उसकी मासूमियत साफ नजर आ रही थी।
मेरे ख्याल से आज के इस दौर में इलियास जैसा हिम्मत वाला कोई नही है। एक 10 साल लड़का अपने घर से दो हजार किलोमीटर दूर अपने परिवार से अलग रह कर मुम्बई में पैसे कमा रहा है और गरीबी को हराने की कोशिश कर रहा है।
अब तक आपके मन मे ये सवाल जरूर आया होगा कि मैं इलियास को पुलिस के पास क्यों नहीं ले गया क्यों नही चाईल्ड लेबर के जुर्म में इलियास के मालिक को गिरफ्तार नही करवाया।
लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि ऐसा करने पर पता नही उस दिन भिवंडी के कितने घरो में चूल्हे नही जलेंगे। क्योंकि हमारे देश में ऐसे एक इलियास नही है। अगर आप गली-गली में घूमोगे तो ऐसे पता नही कितने इलियास आपको मिलेंगे जिनके वजह से उनका घर चलता है।
इलियास से जब और बात हुई तो पता चला कि इलियास 19 मई को अपने घर इलाहाबाद जाने वाला है। और बहुत समझाने पर वो माना कि वो वहीं इलाहाबाद में ही छोटा मोटा काम देख कर अपनी पढ़ाई जारी रखेगा।
मन अब भी व्याकुल है भारत की ये दशा देखकर। जँहा भारत का भविष्य कपड़े का लूम चलता है। मेरे पास भारत की इस दशा के लिए कोई जवाब नही है आपके पास हो तो बताना।
Suraj Mourya

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