
ऐ वक्त तू क्यों इतना न समझ है रे...
तेरी वजह से आज मैं लोगो के लिए पराया हो गया।
किसी ने अपना समझ कर याद रखा तो किसी ने वक्त के साथ भुला दिया।
ऐ वक्त तू क्यों इतना न समझ है रे...
तेरे हर पल को मैं तेरी निसानी समझ के जीता गया।
न जाने किस पल तू रुक सा गया और मैं वक़्त का गुलाम सा हो गया।
ऐ वक्त तू क्यों इतना न समझ है रे...
तूने मुझे दुनिया से लड़ना सिखाया।
पर मैं अपनों से हार गया।
वक्त ने मुझे पत्थर सा बना दिया।
ऐसा पत्थर जिसे बिखर ने तक की इजाजत नहीं है।
ऐ वक्त तू क्यूँ इतना नादान है रे...
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