बंदूकची बुरहान बना रोल मॉडल और जायरा बनी आतंकी।



             
              उसके हाथ ख़ून से नहीं सने थे
              उसने कहीं बम नही फोड़ा था
              उसकी किसी दंगे में शिरकत नहीं थी
              उसने किसी धर्म के ख़िलाफ़ न कुछ कहा, न किया
              उसने तो कपडे भी वल्गर नहीं पहने थे
              फिर भी उसने माफ़ी मांग ली है...
             ( credit-Thellantop.com)


 माफ़ करिएगा अगर टाइटल लिखने में कोई गलती हो गई हो  तो। लेकिन क्या करूँ सच हमेशा कड़वा ही लिखा जाता है।

 अभी हाल ही में दंगल फिल्म में अपने किरदार से करोड़ो  लोगो का दिल जीतने वाली जायरा वसीम अफ़सोस से  कश्मीरियों का दिल जीतने में फेल हो गई। फेल हो गयी या  धर्म के आकाओं ने उसे फेल कर दिया। ये सब हम बखूबी  जानते है।


 ज़ायरा वसीम ने माफ़ी मांग ली है। एक सोलह साल की  बच्ची के पीछे तमाम मज़हबी शेर इस तरह पड़ गए कि घबरा  कर उसे माफ़ी मांगनी ही पड़ी। शमी की बीवी के कपड़ों से  निकले तो इस बात का फैसला करने लगे कि किसको किससे  मिलना चाहिए। कल को ये भी बता देना कि 24 घंटों में  कितनी साँस लेनी है।



 ज़ायरा वसीम ने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती से  मुलाक़ात क्या कर ली मज़हब की धरती कंपकंपाने लगी।  ज़ायरा को रोल-मॉडल मानने से इंकार करने लगी। ज़ायरा  अगर आपकी रोल मॉडल नहीं है कश्मीर वालों, तो कौन है?  वो आतंकवादी जो राइफलों की तस्वीर के साथ फ़ोटो डालते  हैं सोशल मीडिया पर? वो अलगाववादी नेता जिन्होंने  आपको बरसों-बरस महज़ दिलासे दिए हैं, किया कुछ नहीं?  या फिर वो मौलवी जो अपनी तक़रीर में ही इतना ज़हर लिए  होते हैं कि कोबरा भी शर्मा जाए। कौन है आपका रोल  मॉडल?



 आपको कश्मीर की आज़ादी चाहिए लेकिन कश्मीर में  आज़ादी नहीं। इससे पहले भी ‘प्रगाश’ बैंड की लड़कियों से  आपने उनके सपने छीन लिए थे। किसी और की आज़ादी को  छीन कर अपनी आज़ादी की बात करना न सिर्फ हास्यास्पद  है बल्कि बेशर्मी भी है।



 आप लोग शिकायत करते नहीं थकते कि भारत आपको वो  हक़-हुक़ूक़ नहीं देता जिनपर आप अपना अधिकार समझते  हैं। एक औसत कश्मीरी को भारत की मुख्यधारा में कम ही  जगह मिलती है। इस आरोप की सच्चाई को फिलहाल एक  तरफ किनारे रखते हैं। आप बताइये आपने क्या किया भारत  की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए? जिस ज़ायरा वसीम  के  फ़ोटो घर-घर होने चाहिए उसे तो आप धमका रहे हो।  बुरहान  वानी के जनाज़े में भारी भीड़ उमड़ती है। और  ज़ायरा को  मिलती हैं धमकियां।

 पता है जब परवेज़ रसूल का सिलेक्शन हुआ था भारत की  क्रिकेट टीम में तो मुझे इंतज़ार था कि कश्मीर की वादियों में  जश्न मनाया जाएगा। वो इंतज़ार, इंतज़ार ही रहा। मैं इस  वक़्त  आपकी आज़ादी की मांग और उससे जुड़े संजीदा  मसलों को  नहीं छेड़ रहा हूं। उसकी बातें फिर कभी।  फिलहाल तो मैं बस  आपके इस अहमकाना रवैये की बात  करूंगा जिससे आपने  फिर एक बार अपने और बाकी के  भारत के बीच की लकीर  को गहरा किया है।

 ज़ायरा सिर्फ एक कलाकार है। और उसने कुछ भी गलत नहीं  किया है। झुंड बनाकर उस बच्ची के पीछे पड़ने से आपकी  ही छीछालेदर हुई है। इस ग्रैंड लेवल की मूर्खता ज़्यादातर  एक ही मज़हब में क्यों पाई जाती है ये सवाल पूरी दुनिया पूछ  रही है। डरिये उस सूरत-ए-हाल से कि आपका नाम सुनते ही  लोग आपसे दो हाथ दूर छिटकने लगें। हर एक बात में  मज़हब घुसेड़ने से ये अंजाम ज़रूर होगा, हो के रहेगा।



 ज़ायरा के आगे अभी पूरा आसमान है परवाज़ के लिए।  उसके पर ना कतरिए। उसके सेल्फ-कॉन्फिडेंस में पलीता ना  लगाइए। आप जैसे मज़हबी लड़ाकों को नहीं होगी परवाह,  लेकिन हमें है। पूरे देश को है ।

#Suraj Mourya

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