देखना एक दिन ज़िन्दगी में मैं भी जीत जाऊंगा।






रात में पढता दिन पढता फिर भी फेल हो जाता हूँ ।

उड़ने की कोशिश मैं करता बार बार मैं गिर जाता हूँ।

गेरेटिविटी का फ़ोर्स ये क्यूँ मुझ पे इतना ज्यादा है।

मुझको जो कुछ भी है मिलता सब कुछ आधा आधा है।

कल जो मैं था आज मैं जो हूँ उसमे फर्क ज्यादा है।

दुनिया कैसी है अब ये मुझे समझ आता है।

लगता है सबको की आगे कुछ नहीं कर पाउँगा।

देखना एक दिन ज़िन्दगी में मैं भी जीत जाऊंगा।




Suraj Mourya (MSD)

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