क्योंकि कहना जरुरी है...






सभी पत्रकारों से आज एक सवाल है कि क्या आज पत्रकार बनना चाहिए या नहीं। जवाब जरूर दीजिएगा।

और ये भी जरूर बताइएगा की आने वाले समय में पत्रकारिता का क्या भविष्य होगा?

ये सवाल आज ऐसे ही मन में नहीं उठा ये सवाल काफी दिनों से था तब से जब से हिंदुस्तान टाइम्स ने छह शहरों में अपने एडिशन बन्द कर दिए है।

क्या अब वो समय आ गया है कि धीरे धीरे न्यूज़पेपर की लोकप्रियता कम होती जा रही है। क्या भारत अब डिजिटल बन चूका है?

जरा आप ही सोचिये जो न्यूज़पेपर सालो से चला आ रहा है और जिसे के ऊपर बिरला ग्रुप का इतना बड़ा हाथ हो उन्हें आज अपने न्यूज़पेपर को छह शहरो में बंद करना पढ़ रहा है इसकी तो एक ही वजह है कि भैया भारत में डिजिटल क्रांति आ चुकी है जिसका सीधा असर प्रिंट मीडिया पर बड़ी तेजी से हो रहा है।



आपको बताते है कि HT ने जब अपना छठवा एडिशन बन्द किया तो क्या हुआ?

हजारो पत्रकार जिनके घर उनकी कलम पर चलती थी वो अब बेरोजगार हो गए है।

और अब पत्रकारिता की दुनिया में पत्रकारों की अहमियत कम हो गयी है जब से सोशल मीडिया में बुलेट क्रंति हुई है।

आप और हम सभी जानते है कि हमारे भारत में लोग फिल्म देखने के लिए 100 रूपये की टिकट ले सकते है लेकिन वहीँ अगर न्यूज़ देखने के लिए पैसे देने की बात कही जाए तो सब राम राम करते चलते बनते है।

शायद लोगो को नहीं पता होगा कि हमारे देश में आज भी इतने पत्रकार जिन्हें हर महीने प्रॉपर सैलरी नहीं मिलती है।

अब तो आलम ये आ गया है कि भैया अगर रूतबा जताना के लिए पत्रकार बनना है तो ठिख है वरना रहने दीजिए।

क्योंकि जिस तरह से भारत में अब न्यूज़पेपर बन्द हो रहे है उसके बाद तो पत्रकारों के लिए एक ही चारा है वो है वेबसाइट की दुनिया छलांग लगाना।


जी हाँ आने वाला भविष्य यही है लेकिन इसपर भी प्रशन चिन्ह लगा हुआ है।

अपनी राय जरूर दीजियेगा क्योंकि पूरा देश लूट रहा है और बिंदास बोल रहा है तो आप भी बोलिए।

Suraj Mourya (MSD)








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