तलाक तलाक तलाक!!!


       
 




मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का SC को जवाब- सुधार के नाम पर नहीं बदल सकते कानून

ट्रिपल तलाक यानी तीन बार तलाक-तलाक-तलाक बोलकर तलाक दे देने का मुद्दे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना जवाब दाखिल करते हुए हुए साफ किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को कोर्ट नहीं बदल सकते हैं।

ठिख है जब कोर्ट नहीं बदल सकता है तो कौन बदल सकता है ये बता दो..।

आखिर कब तक महिलाओ के साथ धर्म के नाम पर अत्याचार होता रहेगा। जिस रिश्ते में एक पुरुष और महिला जुड़ते है उसे मुस्लिम धर्म के अनुसार सोहर और बेगम का दर्जा दिया जाता है।

इतने बड़े रिश्ते को बस तीन बार तलाक तलाक तलाक कहने खत्म कर देना कहा कि समझदारी है?

जब आज की  युवा पीढ़ी बदलना चाहती है तो क्यू नहीं बदलने देते है ये धर्म के ठेकेदार?

 मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से सर्वोच्च अदालत को बताया गया है कि सामाजिक सुधार के नाम पर मुस्लिम पर्सनल लॉ को बदला या दोबारा नहीं लिखा जा सकता है। इससे पहले 27 अगस्त को इस बात की सुनवाई हुई थी कि क्या इस्लाम में किसी व्यक्ति को चार शादियां करने की इजाजत है? क्या बिना तलाक लिए पति दूसरी शादी कर सकता है?

 Muslim Personal Law Board submits reply before SC, says "Personal laws can't be challenged as it's violation of Part III of constitution" — ANI (@ANI_news) September 2, 2016 पढ़ें-

#आला हजरत का फतवा : महिला बोलेगी तलाक-तलाक-तलाक, देवबंद भी सहमत चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने संकेत दिए थे कि प्रथम दृश्टया ऐसा लगता है कि मुस्लिम व्यक्ति के पहली पत्नी को तलाक दिए बिना चार पत्नियां रखने में कुछ भी गलत नहीं है। इस बेंच में शामिल जस्टिस एएम कानविल्कर और डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि जब तक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तीन बार तलाक-तलाक कहने की इजाजत को खत्म नहीं किया जाता।

तब तक कोई भी व्यक्ति तीन बार तलाक-तलाक बोलकर पत्नी से डायवोर्स ले सकता है। हालांकि, बेंच ने ट्रिपल तलाक को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था और निर्देश दिया कि इस याचिका को ऐसी ही अन्य याचिकाओं के साथ टैग किया जाए, जिसमें केंद्र और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से पहले से ही उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई है।

#सूरज मौर्या

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