मत जाओ मास्टर जी।






आमतौर पर सरकारी स्कूलों को लेकर यही माना जाता है कि वहां पढ़ाई नहीं होती, टीचर पढ़ाने नहीं जाते, पर हम आपको दिखाने जा रहे हैं एक ऐसे नौजवान स्कूल टीचर की कहानी, जिसने अपनी मेहनत और ईमानदारी से स्कूल का कायाकल्प कर दिया... और जब सालों की मेहनत के बाद इसका तबादला हुआ तो क्या बच्चे, क्या गांववाले सब फूट फूटकर रोए...

इस टीचर की मेहनत का नतीजा हाल ही में तब देखने को मिला जब उनका तबादला हुआ। तबादले के बाद ना सिर्फ स्कूल बच्चे, बल्कि पूरा गांव और खुद ये टीचर भी फूट फूट कर रोए। बच्चों ने विदाई के दिन खाना नहीं खाया। पूरे गांव ने नायकों की तरह इस टीचर को बैंड बाजे के साथ विदाई दी, उनपर आशीर्वाद के तौर पर पैसे न्योछावर किए। कहानी है रामपुर के बेहद पिछड़े इलाके शाहाबाद की और टीचर हैं मुनीश यादव।

मैनपुरी के रहने वाले मुनीश की तैनाती जब यहाँ हुई तब स्कूल की हालत बेहद ख़राब थी, कोई टीचर इस पिछडे इलाके में नौकरी नहीं करना चाहता था। आमतौर पर तमाम टीचर घर से इतनी दूर नौकरी करने की बजाए जुगाड़ कर स्कूल नहीं जाना पसंद करते हैं पर मुनीश यादव ने स्कूल को बेहतर करने का फैसला किया। छह साल की कड़ी मेहनत से उन्होंने स्कूल के बच्चों को इतना मेधावी बना दिया कि प्राइवेट स्कूल पीछे होने लगे।इस बीच सरकार की तबादला नीति आई जिसमें मुनीश यादव ने अपना तबादला मैनपुरी करा लिया। यादव जब स्कूल छोड़कर जाने लगे तब सारे स्कूल के बच्चे फूट फूट कर रोने लगे। गांव के लोग भी खूब रोए। इस दौरान खुद मुनीश भी रो पड़े। बच्चों ने मिड डे मील नहीं खाया। बाद में समझाने बुझाने पर बच्चों ने अपने प्रिय गुरू को ढेर सारी मालाएं पहना कर विदाई दी ..

शायद यही होता है जब एक नायक अपने द्वारा सजाये हुए शहर को छोड़ कर जाता है।
 #चर्चा

ऐसे नायको को सलाम करती है।
-सूरज मौर्या

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