इंसानियत अभी बाकि है
आज
के इस कलयुग
में जहा एक
ओर इंसानियत को
शर्मसार कर देने
वाली वारदात बढ़ती
जा रही है
वहीँ दुनिया में
इंसानियत को जिन्दा
रखने के लिए
आज भी बहुत
लोग अपना योगदान
दे रहे है।
दोस्तों आज जो
वाकया में बताने
जा रहा हूँ
वो एक माँ
से सम्बंधित है दरअसल
ललिता सुब्रमणियन 82 साल की
है जो पिछले
20 सालो से
वडाला विलेज के एक
अपार्टमेंट में रहती
है। उनके बेटे
बंगलूरू और यूएस
में रहते है
जो की साल
में एक बार
अपनी माँ से
मिलने आज
जाते है लेकिन
उन्हें पता है
उनकी माँ उनके
एक और परिवार
के साथ सुरक्षित
है आप सोच
रहे होगे की
आखिर ये कौन
सा परिवार है
जो सौतेले होने पर
भी सगे लोग
से भी ज्यादा
प्यार करते है
ललिता सुब्रमनियन को।
ज़िन्दगी
के आखिरी पलो
में जब एक
माँ को सबसे
ज्यादा जरुरत अपने बेटो
की होती लेकिन
अगर उन आखरी
पलो में उनके
बेटे ही साथ
न हो तब
क्या होता है
?
ये
कहानी उन आम
कहानियो सी नहीं
है जहा माँ
को अपने बेटो
की आने की
उम्मीद होती है
जहा माँ उस
उम्मीद में ढेर
सरे सपनो को
संझो कर रखती
है और अपने
बेटो के न
आने पर बिना
शिकायत वो माँ
चुके से रो
लेती है और
खुद को विश्वास
दिलाती है कि
नहीं आ पाया
किस काम में
फसा होगा और
भगवन से दुआ
करने लगती है।
खैर ललिता सुब्रमनियन भी
अपने बेटों से
बहुत प्यार करती
है उन्हें याद करती
है और उनके
लिए भगवन से
दुआ भी करती
है।
अपने बेटो
से भले ही
दूर हो लेकिन
प्यार की कमी
उन्हें कभी नहीं
पड़ती उनके एक
कॉल पर हाजिर
हो जाते है
उनके खिदमत में
पुलिसवाले। प्यार
से MOM बुलाते है उन्हें।
मुंबई के माटुंगा
पुलिस ने बड़े
ही धूम- धाम
से मनाया उनका
82 वा जन्मदिन। इस
अवसर पर माटुंगा
पुलिस स्टेशन के
वरिष्ट पुलिस निरीक्षक कहा
की पुलिस ठाणे
में सब उन्हें
माँ बुलाते है।
वो हमारे परिवार
के सदस्य की
तरह है। लेकिन
बढ़ती उम्र के
चलते वो अब
बोलने में सक्षम
नहीं है लेकिन
फिर भी जब
वो हमे एक
मिस कॉल देती
है तब हम
में से कोई
एक उनके घर
पहुंच जाता हैं
उनकी मद्दत के
लिए। ललिता
सुब्रमणियन की माने
तो पिछले 20 सालो
से हर रोज
माटुंगा पुलिस स्टेशन से
कोई न कोई
उनके घर उनके
चेक - उप लिए आ
जाता है और
साथ ही उनकी
दवाईया भी लाते
है। ये मेरे
बेटो की तरह
है। ये लोग
मुझे कभी अकेला
महससू नहीं होने
देते है जब
मुझे अपने बेटों
की याद आती
है। एक
शेरे छोड़ जाता
हूँ अरे भाई
ये मैंने नहीं
लिखा है ,किसी
मशहूर शायर ने
लिखा है ……
लबों
पे उसके कभी
बद्दुआ नहीं होती ,बस
एक माँ है
जो मुझसे ख़फ़ा
नहीं होती…
----सूरज मौर्या
----सूरज मौर्या
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