वो तकलीफ में है जनाब उन्हें सियासत कहा समझ आती है।


सुखा, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि जैसे प्राकृतिक आपदाओ से अपनी फसले गवा बैठे हजारो किसानो को अब सरकार से मदद की उम्मीद है। लेकिन राजनीति में व्यस्त सत्ता पक्ष और विपक्ष को इनकी कहा फिकर। पांच दिन गुजर चुके है नागपुर में चल रहे, विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन को परंतु किसानो की उम्मीद की झोली अब तक खली है। जंहा एक ओर सरकार किसानो के लिए दीर्घकालीन उपाय सोच रही है वहीँ विपक्ष का कहना है की सरकार को जो करना है करे लेकिन तत्काल किसानो का कर्ज माफ़ करे। सिर्फ इसी मुद्दे को लेकर गत पांच दिनों से विधानसभा का शीतकालीन सत्र बेतुकी बातों पर चल रहा है। अब तो बस यही  लगता है की यह मुद्दा अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है। विपक्ष का कहना की जब तक सरकार किसानो के कर्ज माफ़ नहीं करती तब तक हमें सदन के काम में कोई दिलचस्पी नहीं। विपक्ष के इस बयान के बाद ये कहना गलत नहीं होगा की सरकार और विपक्ष को किसानो की खुदखुशी से कुछ लेना - देना नहीं है उन्हें तो बस अपनी सिहसी रोटियाँ सेकना हैं।  सरकार को लगता है की अगर सरकार विपक्ष की बात मान जाए और किसानो के कर्ज को माफ़ कर दे तो किसनो के बीचे विपक्ष की वाह - वाही होगी। जब से नागपुर में विधानसभा का शीतकालीन अधिवेशन शुरू हुआ है तक़रीबन हर दिन सरकार के खिलाफ आधा दर्जन बड़े- बड़े मोर्चे आ रहे है। इससे लोगो में सरकार के खिलाफ बढ़ रहे गुस्से का तर्क लगाया जा सकता हैं। अगर सरकार जल्दी ही किसनो के लिए कुछ नहीं करती है तो विपक्ष सरकार के खिलाफ हंगामे का कोई मौका नहीं छोड़ेगा। आज हालात ये है कि गन्ना किसान, कपास किसान ,सोयाबीन किसान, संतरा किसान और केला और अनार उत्पादक किसान सभी की हालत ख़राब है। बीजेपी का आरोप है कि इसके पहले भी सात वर्ष पूर्व सरकार ने सुखा पढ़ने की वजह से किसानो के कर्ज माफ़ किये थे लेकिन कुछ लोगो के मिलीभगत के कारण  वो पैसा आज तक किसानो नहीं पहुंच पाया। परन्तु सूखे का ये लगातार चौथा वर्ष है आज सच में किसानो को मददः की जरुरत है। लेकिन सियासत के दंगल में उलझी  सरकार किसनो के निवारण के लिए अब तक कोई मार्ग खोज नहीं पायी है। लगता है सरकार ने मराठवाड़ा में  हाल ही में पड़े अकाल और सुखाग्रस्त से परेशान किसानो की गुहार को नहीं सुनी है अगर सच में नहीं सुनी है तो उन्हें यूट्यूब पर जा कर मीडिया कवरेज देखनी चाहिए तब शायद सरकार सियासी रोटी सेकने के बजाये किसनो के लिए कोई फैसला कर दे।...सुरज मौर्या

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