इंडिया को नो उल्लू बनवाइंग राहुल बाबा



        

          इंडिया को नो उल्लू बनवाइंग राहुल बाबा





कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सक्रियता और मेहनत से इंकार नहीं क्या जा सकता, लेकिन उनकी राजनीति आज भी रोड शो के अंदाज पर आधारित है। वो गावों में जाते है, पदयात्रा करते है, किन्तु व्यवारिक रूप से यह किसी भी व्यक्ति के लिए संभव ही नहीं कि वह एक साथ हजारो लोगो की बात सुन ले। समाधान की बात तो बहुत दूर है, यंहा तक कि राहुल के निर्वाचन क्षेत्र में लोगो की शिकायत रहती है कि वह अपने जन प्रतिनिधि तक अपनी बात नहीं पंहुचा पाते है। जबकि राहुल यंहा भी घूमते, हाथ मिलाते चलते है। फिर चाहे वह दस वर्ष से सत्ता पक्ष में रहे हो या डेढ़ वर्षो से विपक्ष में हो, लेकिन उनका राजनितिक अंदाज परंपरा के रूप जारी रहता हैं। राहुल पहले भी किसानो के बीच जाते थे, आज भी यही कर रहे है। ना पहले किसानो, गरीबो, मजदूरो की दशा सुधर सके, लेकिन विड़बना ये है कि आज तो वह ऐसा करने के स्थिति में नहीं है लेकिन फिर भी किसानो की मदद की बिगुल बजाये जा रहे ठीक उसी तरह जैसे कोई इंसान बिन पेंदी की लोटे में पानी भरे जा रहा है और ये उम्मीद में है कि एक दिन ये लोटा पानी से ढाबा-ढब भरा होगा। यदि दस वर्षो तक उनकी सरकार ने बेहतर व ईमानदारी से काम किया होता, तो आज राहुल को गरीबो, किसानो, मजदूरो की इस तरह दुहाई नहीं देनी होती और नहीं इतनी मेहनत भी करनी पड़ती। क्योकि ये भी सच नहीं है कि देश में सभी कमिया एक साथ केवल डेढ़ वर्ष में आ गयी, लेकिन राहुल अपनी राजनीति से यही यही दिखाने का प्रयास करते है कि सभी समस्याओ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद् मोदी जिम्मेदार है।....सूरज मौर्या

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