मॉर्निग ब्रेकफास्ट


                                                    मॉर्निग ब्रेकफास्ट





आखिर माँ तो माँ होती है , चाहे वो हम पर कितना भी गुस्सा क्यों न कर ले अगर एक पल के लिए भी हमारा मोबाइल स्विच-ऑफ आया तो वो हमे तब तक कॉल करती है जब तक की हमारा मोबाइल ऑन नहीं हो जाता है। आज ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ मम्मा से आज सुबह के ब्रेकफास्ट को लेकर बहस हो गयी थी। मुझे कॉलेज जाने में आल- रेडी लेट हो चूका था और मम्मा का ये ब्रेकफ़ास्ट शायद मुझे और भी लेट करा देता। मम्मा किचन से अरे बेटा ब्रेकफास्ट कर के ही कॉलेज जाना लेकिन सुरज था की अपने कॉलेज प्रोजेक्ट में लगने वाले चीज़ो के बारे सोच रहा था और साथ ही व्हाट्सऐप पर लगातार चैटिंग किये जा रहा था। मम्मा किचन से एक बार फिर आवाज लगाती है बेटा सुरज ब्रेकफास्ट कर के ही जाना लेकिन सुरज न ही हाँ में जवाब देता और नहीं न में। जिससे माँ थोड़ा सा नाराज हो जाती है फिर थोड़ा - सा चिढ़ती हुए कहती है इस मोबाइल ने तुझे बिगाड़ दिया है ठरररेए जा तुझ से आज ये मोबाइल ही छीन लेती हूँ तब तक मम्मा किचन से जोर से आती है और मुझसे मोबाइल छिन्न लेती है। और मुझे डांटने लगती है..... आखिर एक माँ यही चाहती न की उसका बेटा खुश रहे टाइम पर खाना खाए और टाइम पर घर आये और जहा भी जाये सही सलामत रहे लेकिन फिर भी हम अपने माँ को नहीं समझ पाते है। 

सुरज अचानक से जोर से मम्मा - मम्मा मोबाइल दो मेरा और नहीं चाहिए मुझे आपका ये ब्रेकफास्ट रखो इसे , मेरे पास टाइम नहीं है मैं जा रहा हूँ इतना कहते हूँ सूरज अपना बैग लेकर कॉलेज चला जाता है। और माँ वैसे ही ज्यो की त्यों खड़ी रहती है। और सोचने लगती है जब बेटा छोटा होता है माँ उसे जो भी खाने को देती वो उसे ही खता , माँ की पसंद को अपनी पसंद बना लेता, माँ उसे जैसे रखती है वो वैसे ही रहता है लेकिन आज मेरा बेटा इतना बड़ा हो गया है तू की आज तुझे मेरा डाटना तक इतना बुरा लग गया की तू मुझे ही दो बातें सुना गया। खैर माँ इन बातों को भूल कर अपना काम करने लगती है लेकिन इतने काम होने के बावजूद सुरज कि माँ की नजरे घडी पर थी उसे याद था की सुरज ठिक २ बजे कॉलेज से घर आता है और खाना खता हैं लेकिन आज सुरज टाइम पर घर नहीं आया था। माँ ने सोचा कि थोड़ा नाराज होगा बेचारा अभी आ जायेगा थोड़ी देर में मैंने भी सुबह-सुबह उसे डांट दिया मैं ही पागल हूँ।

 इतना कह कर मम्मा काम करने लगती है। लेकिन फिर भी जब मन नहीं माना तो वह सुरज को कॉल करने लगी लेकिन सुरज का मोबाइल स्विच - ऑफ था। वो सुरज को तब तक कॉल करती रही जब तक की उसका मोबाइल ऑन नहीं हो गया। करीब आधे घंटे बाद जब कॉल लगा तो सुरज ने जैसे ही कॉल अटेंड किया वैसे ही माँ ने पूछा "बेटा कहा हो आज लेट होगा क्या घर आने में अभी तक आपने खाना भी नहीं खाया कब तक घर आ रहे हो " एक पल को मैं ये सोचने लगा जिस माँ से मैं सुबह झगड़ कर कॉलेज आया था वो माँ मेरी ऐसे हरकत से थोड़ा भी नाराज नहीं है सचमे माँ जैसा कोई नहीं है। हेलो हेलो बेटा बोलो "हाँ माँ बास मैं घर ही आ रहा हूँ वो शूट चल रहा था तो मोबाइल ऑफ करना पड़ गया था आप खाना खालो मैं बस पहुंच रहा हूँ " कॉल कट होने के बाद जब मैंने अपना कॉल लिस्ट चेक किया तो उसमे मम्मा के ५० मिस -कॉल्स देख कर मेरे आँखों से आंसू निकल गए। ....... सुरज मौर्य

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