बलात्कारी बाबा बना कैदी नंबर 8647

उतर गया इंसानियत का चोला। भर गया पाप का घड़ा। अब न वो राम रहीम है ना ही मैसेंजर टू गॉड। जेल की कोठरी ही है अब उसका डेरा है।

भले ही 15 साल लग गए हो हमारे न्याय व्यवस्था को गुरमीत राम रहीम को बल्तकारी सिद्ध करने में लेकिन ये कहना सही होगा कि देर आये पर दुरुस्थ आये।

सीबीआई जज जगदीप सिंह द्वारा सजा सुनाने के बाद जेल में बल्तकारी बाबा को कैदी नंबर  8647 मिला। अब जेल में ही बीतेगी उसकी पूरी ज़िंदगी



30 जुलाई 2007 को चार्जशीट फ़ाइल की गई थी।

25 अगस्त 2017 को आरोपी करार दिए गए।

जिसके बाद 28 अगस्त 2017 को सजा सुनाई गई।

दोनों यौन शोषण में गुरमीत राम रहीम को 10 -10 साल की सजा सुनाई गई है।

साथ ही 30 लाख रुपए का भी जुर्माना लगाया।

धारा 376 और 507 के तहत बलात्कारी बाबा को सजा सुनाई गई है।


कोर्ट में CBI ने 15 गवाह पेश किए तो वहीं बचाव पक्ष ने 36 गवाह पेश किए। लेकिन कोर्ट में इसका कुछ फायदा नहीं हुआ।

कोर्ट में दोनों पक्षों को अपनी अपनी दलीली रखने के लिए 10 - 10 मिनट दिए गए। आरोपी पक्ष के वकील ने अपने दलील में कहा कि गुरमीत राम रहीम एक समाज सेवी है। उन्होंने समाज के लिए बहुत काम किए है। जगह जहग ब्लड कैप्म रखे। हॉस्पिटल खोले। स्कूल बनवाए। इसलिए उनके साथ नरमी बरती जाए।

वहीं CBI के वकील ने अपनी दलील में कहा कि भले ही इन्होंने जो भी काम किए हो लेकिन इन्होंने धर्म के नाम पर सबको धोखा दिया है और साथ ही निरंतर यौन शोषण भी किया। इन्हें कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीली सुनने के बाद जज ने अपना ऐसा फैसला सुनाया की बल्तकारी बाबा के रोमटे खड़े हो गए। बल्तकारी बाबा 20 साल की सजा सुना दी।

जिसके बाद राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल भेज दिया गया।


Suraj Mourya

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