अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ। बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ ! लम्बे समय से तो नहीं बस बीते कुछ समय से लिखने का भूत चढ़ गया है। और अब इसे उतारना मुश्किल है। लिखना आता नहीं मुझे बस यूह ही बड़े लेखको को देख कर सिखने की कोशिश करता हूँ। शायद ये सोच कर की उनकी तरह तो नहीं पर कुछ लिखना जरूर सिख जाऊंगा।