GST पक्ष और विपक्ष के सहमती से लागू हुआ है आम जनता के नहीं।


                         

जैसा कि आप सभी जानते है GST लागू हो चुका है। अब हमारे बीच GST नाम का एक और कर आ गया है। बहोत लोग खुश होंगे और   बहोत लोग नहीं भी होंगे। लेकिन क्या होगा जो खुश नही है उनका भरना तो पड़ेगा ही ना।

GST क्या है गुड्स एंड सर्विस टैक्स यही न। आप मुझे बताइए क्या पहले हम गुड्स और सर्विस टैक्स नही भरते थे क्या। हम पहले भी टैक्स भरते आये है और अब भी भर ही रहे है ना। तो आप समना टैक्स की बात किस हिसाब से कर रहे हो। GST में भी सरकार ने कुछ प्रतिशत हक राज्य सरकार को टैक्स वसूलने को दिया है। तो सरकार किस हिसाब से कह सकती है कि वो देश मे एक ही कर स्थापित करना चाहिए चाहती है। आम जनता को गुमराह क्यों किया जा रहा है समना टैक्स के नाम पर।

GST को अभी लागू हुए कुछ ही दिन हुए है लेकिन अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव है तो आप को लोगो के होटल्स के बिल पोस्ट किए हुए मिलेंगे जिसमे GST और सर्विस टैक्स की कीमत आपको देखने को मिलेगी।


(तस्वीर में दिख रहे शख्स को पता है क्या की क्या है GST लेकिन फिर भी इसे भरना होगा।)

मेरे हिसाब से GST एक थोफ़ा हुआ कर है जिसका बोझ अब हमें ढोना है क्योंकि हम इस आज़ाद भारत के आज़ादी के नाम पर पिंजरे में रखे जाने वाले पंक्षी है। जो सिर्फ पिंजरे के अंदर ही आवाज़ कर सकता है और उछल कूद सकता है लेकिन पिंजरे के बाहर नहीं आ सकता। गलती से अगर बाहर आ भी गया तो या तो मार दिए जाएगा या फ़ीर अंदर डाल दिए जाएगा। यही हाल आज इस देश के लोगो का हो गया है।

मुझे पता है कि आप लोगो मुझे कह रहे होंगे कि ये शब्दो से इतनी निंदा कर रहा है फिर भी कह रहा है कि इस देश मे आज़ादी नही है। इस देश मे सिर्फ शब्दों की आज़ादी।

मेरे हिसाब से GST का लागू करवाना कांग्रेस और बीजेपी का फैसला है। तो ये फैसला जनता का कैसे हुआ। क्या GST लाने से पहले सरकार ने आम जनता की राय ली थी। नहीं ना। क्यों नही ली थी। ले ना चाहिए था न। सरकार तो कह रही है कि जनता के हित में लिया गया है फैसला तो जनता से एक बार पूछ लेना चाहिए न। क्यों क्या हमें कोई हक नहीं है क्या की हम अपने हित के बारे में कोई फैसला ले सके।

(ये एक बिल है जो GST लागू होने से पहले 70 रुपये का होता था लेकिन अब देखो 83 का हो गया है।)

जब कांग्रेस की सत्ता थी तब बीजेपी GST का विरोध कर रही थी और अब जब बीजेपी की सत्ता आयी तो कांग्रेस GST का विरोध कर रही थी। लेकिन अचानक देखने को मिलता है कि  GST को अचानक पक्ष और विपक्ष की तरफ से हरि झंडी मिल जाती है और GST आम जनता पर लागू हो जाता है।

इसका मतलब ये है कि GST लागू करना सत्ता और विपक्ष का फैसला है जनता का नहीं।
और ये बात हम सब जानते है कि जहाँ सत्ता और विपक्ष एक हो जाए वहाँ जरूर कोई झोल झाल है।

चलो कोई नही हम भारत के लोग है हम पुरी दुनिया का बोझ उठाते है अब GST का भी उठाएंगे। बस अब मेरी 100 की नोट जो पहले चार हिस्सो में बटती थी वो अब पांच में बटेगी। लेकिन मेरे पास अब भी 100 रुपये है।

आप सब से एक सवाल है GST लगने से टैक्स में तो विजाफा आया है लेकिन क्या हमारे इनकम में विजाफ़ा हुआ। सबको पता है नहीं हुआ है। जिसकी जो तनख्वाह थी वही है बस अब खर्चे बढ़ गए।

कुल मिला कर यही बात है कि इस देश मे जनता के लिए फैसले सत्ता पक्ष और विरोधी विपक्ष लेती है। न कि आम जनता।

By, Suraj Mourya

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