आज फिर अपना हाथ बेलेट से काट रहा था रोहित। ऐसा नहीं था रोहित। वो तो कुछ बनना चाहता अपने ज़िंदगी में अपने माँ पापा के लिए करना चाहता कुछ फिर अचानक वो अपना हाथ क्यू कटाने लगा। दरअसल जब माँ पापा बच्चों को छोड़ कर अपने ही झगड़ों में उलझ जाते है तब उसका असर उनके बच्चों पर होता है वो डिप्रेशन में चले जाते है।
आज तकरीबन २० साल हो गये है माँ पापा को लगातार हर छोटी बातों को लेकर झगड़ते।। साथ ही रोहित भी २० साल का हो चूका है वो उन सभी लड़को से अलग है जो उसके जोड़ीदार के लड़के करते है। लेट नाइट्स पार्टीस करना कहीं दूर टूर पर जाना ट्रैकिंग पर जाना। आप सोच रहे होंगे की रोहित आखिर क्यों नहीं है उन लड़कों जैसा, खैर बात इतनी भी सिंपल और आसान न थी रोहित के लिए उन लड़कों जैसे हो जाना उसे हर वक्त इस बात का डर था कि उनके घर कब लड़ाई का संग्राम शुरू हो जाये और कब पापा मम्मी को मारने लगे और कब मम्मी गालियाँ देने लगे। इसीलिए वो हमेशा से अपने दोस्तों द्वारा लेट नाइट्स पार्टी या फिर कोई ट्रीप के प्लान को टालते आ रहा था उसे को डर था कि उसके घर पर न रहने पर पता नहीं क्या होगा पता नहीं दोनों में कितना झगड़ा होगा।
माँ बाप आखिर क्यू ये नहीं सोचते कि उनके झगड़ने से उनके बेटे पर क्या असर पड़ता है। और क्या बीतती है उनके अपने घर में मौजूद सबसे बड़े बेटे पर। क्या शादी के कुछ सालों बाद अपनी घर गृहस्थी को अच्छे से न संभाले जाने पर लड़ना और झगड़ना ही एक पर्याय रह जाता है।

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